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एक रफ़्तार समय संचार

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गया रेल परिसर की दुर्दशा का जिम्मेवार कौन ?

गया शहर का अपना एक गौरवशाली इतिहास रहा है। गया शहर को लोग विश्वप्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर, महात्मा बुद्ध की ज्ञानस्थली एवम सनातनी मोक्ष की धरती के रूप में जानते है । जहा विश्व भर के बौद्ध अनुयायी यहाँ पर्यटक के रूप में आते हैं वही हिन्दुओ के द्वारा अपने पितरो के तर्पण के लिए यहाँ आना जाना सालोभर लगा रहता। गया शहर पर्यटकों को अपने ऐतिहसिक विरासत के कारण अपनी ओर आकर्षित करती है। ऐसे ऐतिहासिक स्थल को जहाँ सवार कर रखनी चाहिए वहीं हमारी गया रेलवे के द्वारा इस दिशा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है और ना ही उठाया जा रहा है। गया स्टेशन के आतंरिक एवम बाहरी परिषर में चारो तरफ गन्दगी का अम्बार लगा रहता है। मलमूत्र यत्र तत्र बिखरा रहता है। सफाई की लचर ब्यवस्था साफ साफ दृष्टिगोचर होती है। स्टेशन के बाहरी परिषर में शौचालय की ब्यवस्था नहीं होने के कारण लोग खुले में सौच करने को विवश होते है। जिसके कारण संक्रमण का खतरा हमेसा बना रहता है। मध्य ओवरब्रिज के निकासी द्वार के पास चारो तरफ मलमूत्र फैला हुआ दिखना आम बात है। रेलवे स्टेशन अधीक्षक के द्वारा उदासीन रवैया अपनाने के कारण ही चारो तरफ गन्दगी देखने को मिलना आम बात है।



गया रेलवे स्टेशन अधीक्षक, स्टेशन के आतंरिक और बाहरी परिषर में या तो देखते नहीं हैं या फिर जानबूझकर अनदेखा करते हैं, जिसका परिणाम स्टेशन के चारो और गन्दगी का मिलना है। गया रेलवे स्टेशन के आतंरिक एवं बाहरी परिषर में स्वक्षता के लिए जो भी उचित कदम हो उसे उठाने का प्रयास करना चाहिए, ताकि जब भी कोई पर्यटक यहाँ आए तो एक अच्छी और मनमोहक यादों को संयोजकर अपने साथ ले जाय। इससे गया में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार की सम्भावना बढ़ेगी और गया शहर को लोग एक स्वक्ष शहर के रूप में देखेंगे।

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